CIBIL SCORE New Rule 2025: आज के समय में सिबिल स्कोर हर व्यक्ति के वित्तीय जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कोई भी लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करने से पहले बैंक सबसे पहले आवेदक के सिबिल स्कोर की जांच करता है। यह स्कोर ग्राहक की लोन और क्रेडिट बिल की चुकाने की क्षमता और इतिहास के आधार पर तय किया जाता है। सिबिल स्कोर 300 से 900 अंकों के बीच होता है, जिसमें 750 या उससे अधिक अंक एक अच्छा स्कोर माना जाता है। अच्छा सिबिल स्कोर होने पर ग्राहकों को कम ब्याज दरों पर आसानी से लोन मिल जाता है, जबकि खराब स्कोर होने पर लोन मिलना मुश्किल हो जाता है और मिलने पर भी ब्याज दर अधिक होती है। आजकल तो कुछ बैंक नौकरी के लिए भी उम्मीदवारों के सिबिल स्कोर की जांच करने लगे हैं।
आरबीआई द्वारा नए नियमों की घोषणा
सिबिल स्कोर से संबंधित अनेक शिकायतें मिलने के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने ग्राहकों के हित में 5 नए नियम बनाए हैं। ये नियम 26 मार्च 2025 से लागू हो गए हैं। इन नियमों का उद्देश्य सिबिल स्कोर प्रणाली में पारदर्शिता लाना और ग्राहकों को अधिक जानकारी और सशक्त बनाना है। आरबीआई ने क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियों और बैंकों को इन नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। इन नियमों के लागू होने से उपभोक्ताओं को होने वाली कई समस्याओं का निराकरण होगा और उन्हें अपने वित्तीय मामलों में अधिक नियंत्रण मिलेगा।
सिबिल स्कोर की जांच की सूचना देना अनिवार्य
आरबीआई के नए नियमों के अनुसार, अब बैंक या नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (एनबीएफसी) किसी ग्राहक का सिबिल स्कोर गुपचुप तरीके से नहीं जांच सकते। जब भी कोई वित्तीय संस्था किसी उपभोक्ता का सिबिल स्कोर चेक करती है, तो उसे इसकी सूचना एसएमएस या ईमेल के माध्यम से ग्राहक को देनी होगी। यह नियम ग्राहकों की निजता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है। इससे ग्राहकों को यह जानकारी मिलेगी कि कौन-कौन सी संस्थाएं उनके क्रेडिट इतिहास की जांच कर रही हैं और वे अपने सिबिल स्कोर पर होने वाले प्रभाव के बारे में सचेत रह सकेंगे।
लोन या क्रेडिट कार्ड अस्वीकार होने का कारण बताना अनिवार्य
एक महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि अगर कोई बैंक किसी ग्राहक के लोन या क्रेडिट कार्ड के आवेदन को अस्वीकार करता है, तो उसे इसके कारण बताने होंगे। पहले बैंक बिना कोई कारण बताए आवेदन अस्वीकार कर देते थे, जिससे ग्राहकों को अपनी कमियों का पता नहीं चलता था। अब बैंकों को सभी क्रेडिट संस्थानों को आवेदन अस्वीकार करने के कारणों की सूची देनी होगी। इससे ग्राहकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि उनके आवेदन क्यों अस्वीकार किए गए और वे अपनी आगामी रणनीति तैयार कर सकेंगे। यह नियम ग्राहकों को अपने वित्तीय स्वास्थ्य को सुधारने में मदद करेगा।
वर्ष में एक बार फ्री फुल क्रेडिट रिपोर्ट प्रदान करना
आरबीआई के निर्देशों के अनुसार, अब सभी क्रेडिट सूचना कंपनियों को वर्ष में एक बार ग्राहकों को मुफ्त में पूर्ण क्रेडिट रिपोर्ट उपलब्ध कराना होगा। इसके लिए कंपनियों को अपनी वेबसाइट पर एक विशेष लिंक प्रदान करना होगा, जिसके माध्यम से ग्राहक अपनी क्रेडिट रिपोर्ट आसानी से देख सकेंगे। यह सुविधा ग्राहकों को अपने क्रेडिट इतिहास की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने में मदद करेगी और वे अपने सिबिल स्कोर में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठा सकेंगे। इससे वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों को अपने क्रेडिट स्कोर पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा।
बिना सूचना के डिफॉल्टर घोषित नहीं कर सकेंगे
आरबीआई के नए नियमों के अनुसार, अब बैंक या एनबीएफसी किसी ग्राहक को सीधे लोन डिफॉल्टर घोषित नहीं कर सकते। ऐसा करने से पहले, उन्हें ग्राहक को इसकी सूचना देनी होगी, ताकि ग्राहक अपना पक्ष रख सके या बकाया राशि का भुगतान कर सके। यह सूचना ईमेल, एसएमएस या फोन के माध्यम से दी जा सकती है। इसके अलावा, आरबीआई ने सभी बैंकों को सिबिल स्कोर से संबंधित मुद्दों के समाधान के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के भी निर्देश दिए हैं। यह नियम ग्राहकों को उनके क्रेडिट इतिहास को बिगाड़ने वाली गलतियों से बचाने में मदद करेगा।
शिकायत निवारण की समयसीमा और जुर्माना
आरबीआई ने सिबिल स्कोर से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए एक स्पष्ट समयसीमा भी निर्धारित की है। बैंकों और क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियों को ग्राहकों की शिकायतों का समाधान 30 दिनों के भीतर करना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें हर दिन के विलंब के लिए 100 रुपये का जुर्माना देना होगा। समयसीमा को और विस्तृत करें तो, लोन देने वाली संस्था को शिकायत मिलने के बाद 21 दिन का समय दिया गया है, जबकि क्रेडिट ब्यूरो को 9 दिन का समय मिला है। अगर इस समयसीमा का पालन नहीं किया जाता है, तो जुर्माना संबंधित संस्था पर लगेगा। यह नियम ग्राहकों की शिकायतों के त्वरित समाधान को सुनिश्चित करेगा।
शिकायतों का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य
आरबीआई के नए निर्देशों के अनुसार, सभी क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियों को ग्राहकों की शिकायतों का रिकॉर्ड रखना होगा और इन शिकायतों की संख्या को अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित करना होगा। इससे कंपनियों की सेवाओं की गुणवत्ता और उनके ग्राहक सेवा प्रदर्शन का आकलन करने में मदद मिलेगी। यह नियम पारदर्शिता बढ़ाएगा और कंपनियों को अपनी सेवाओं में सुधार करने के लिए प्रेरित करेगा। इससे अंततः ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी और उनकी शिकायतों का अधिक प्रभावी ढंग से समाधान होगा।
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें दी गई जानकारी आरबीआई द्वारा जारी निर्देशों पर आधारित है। नियम और प्रावधान समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए अद्यतन जानकारी के लिए आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट या अपने बैंक से संपर्क करें। इस लेख में उल्लिखित किसी भी जानकारी पर कार्य करने से पहले, कृपया अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।