DA Hike: मार्च 2025 में केंद्रीय कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (डीए) में बढ़ोतरी की खबर आई है, जो कई कर्मचारियों के लिए उम्मीद से कम रही है। हर साल की तरह इस बार भी सरकार ने होली के आसपास जनवरी से जून 2025 के लिए डीए बढ़ोतरी की घोषणा की है। लेकिन इस बार की बढ़ोतरी ने कई कर्मचारियों को निराश किया है, क्योंकि यह पिछले सात सालों में सबसे कम बढ़ोतरी मानी जा रही है।
डीए बढ़ोतरी का विवरण और महत्व
महंगाई भत्ता (डीए) केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण भत्ता है, जो उन्हें बढ़ती महंगाई से राहत देने के लिए दिया जाता है। सरकार साल में दो बार – जनवरी और जुलाई में महंगाई भत्ते में संशोधन करती है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों की क्रय शक्ति को बनाए रखना और उन्हें महंगाई के असर से बचाना है।
वर्तमान में, 7वें वेतन आयोग के तहत, केंद्रीय कर्मचारियों को उनकी बेसिक सैलरी का 53% महंगाई भत्ता मिल रहा है। हालांकि, अब इसमें केवल 2% की बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे यह बढ़कर 55% हो जाएगा। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2025 से लागू होगी और कर्मचारियों को मार्च के वेतन के साथ जनवरी और फरवरी के एरियर भी मिलेंगे।
पिछले सात सालों में सबसे कम बढ़ोतरी
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार की 2% की बढ़ोतरी पिछले सात सालों में देखी गई सबसे कम बढ़ोतरी है। जुलाई 2018 के बाद से, डीए में कभी भी 3% से कम की बढ़ोतरी नहीं हुई थी। सामान्यतः, पिछले कई वर्षों में डीए में 3% से 4% की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
पिछले साल 2024 में, सरकार ने डीए को दो चरणों में कुल 7% बढ़ाया था। पहले चरण में जनवरी 2024 में 4% की बढ़ोतरी की गई, जिसकी घोषणा मार्च 2024 में हुई थी। दूसरे चरण में, जुलाई से दिसंबर 2024 के लिए 3% की बढ़ोतरी की गई, जिसकी घोषणा अक्टूबर 2024 में की गई थी। इस प्रकार, डीए 46% से बढ़कर वर्तमान में 53% हो गया था।
कम बढ़ोतरी के कारण
इस बार की कम बढ़ोतरी का मुख्य कारण पिछले छह महीनों के अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI) के आंकड़े हैं। सरकार इन्हीं आंकड़ों के आधार पर डीए की गणना करती है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले छह महीनों में महंगाई दर में अपेक्षाकृत कम वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप डीए में भी कम बढ़ोतरी होगी।
इसके अलावा, सरकारी बजट पर पड़ने वाले प्रभाव को भी इस निर्णय में शामिल किया गया हो सकता है। डीए में हर 1% की बढ़ोतरी सरकारी खजाने पर भारी बोझ डालती है, इसलिए आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकार ने इस बार कम बढ़ोतरी करने का फैसला लिया हो सकता है।
कोरोना काल में डीए पर लगी रोक
यह भी ध्यान देने योग्य है कि कोरोना महामारी के दौरान सरकार ने जनवरी 2020 से जून 2021 तक के 18 महीनों के लिए डीए में बढ़ोतरी पर रोक लगा दी थी। इस अवधि के दौरान केंद्रीय कर्मचारियों को उनके वेतन का भुगतान तो किया गया, लेकिन महंगाई भत्ते में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई।
इसके बाद से, कर्मचारी संगठनों द्वारा लगातार इन 18 महीनों के रुके हुए डीए को बहाल करने की मांग की जा रही है। हालांकि, अभी तक सरकार ने इस संबंध में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बना हुआ है।
कर्मचारियों पर इसका प्रभाव
डीए में होने वाली इस कम बढ़ोतरी का सीधा असर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की आमदनी पर पड़ेगा। हालांकि 2% की बढ़ोतरी से उनकी क्रय शक्ति में कुछ हद तक सुधार आएगा, लेकिन यह बढ़ती महंगाई के अनुपात में पर्याप्त नहीं हो सकता है।
उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी का मूल वेतन 30,000 रुपये है, तो 2% की बढ़ोतरी से उसे प्रति माह लगभग 600 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। यह राशि वर्तमान महंगाई के संदर्भ में बहुत कम लग सकती है, जबकि अगर 3% या 4% की बढ़ोतरी होती, तो वह 900 या 1,200 रुपये अतिरिक्त पा सकता था।
आठवें वेतन आयोग की उम्मीद
इस साल की शुरुआत में, जनवरी 2025 में, सरकार ने आठवें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की थी। इसे जनवरी 2026 से लागू किया जा सकता है। केंद्रीय कर्मचारियों के लिए यह एक बड़ी खुशखबरी है, क्योंकि इससे उनके वेतन और भत्तों में महत्वपूर्ण बदलाव आने की उम्मीद है।
इससे पहले, इस साल जुलाई 2025 से एक और डीए बढ़ोतरी होगी, जिसकी घोषणा अक्टूबर 2025 में की जा सकती है। आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद, 50% से अधिक डीए को मूल वेतन में मिला दिया जा सकता है, जैसा कि पिछले वेतन आयोगों के समय में हुआ था। इसके बाद, डीए फिर से शून्य से शुरू होगा और नए सूत्र के अनुसार बढ़ेगा।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र सरकार इस बार केवल 2% की बढ़ोतरी करती है, तो इससे कर्मचारियों में असंतोष पैदा हो सकता है। कई कर्मचारी संगठन पहले से ही कोरोना काल के दौरान रोके गए डीए को बहाल करने की मांग कर रहे हैं, और अब कम बढ़ोतरी से उनकी निराशा और बढ़ सकती है।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि महंगाई दर में कमी आने के कारण कम बढ़ोतरी उचित है। AICPI के आंकड़ों पर आधारित यह बढ़ोतरी महंगाई के वास्तविक स्तर को दर्शाती है, और सरकार इसी आधार पर निर्णय लेती है।
केंद्रीय कर्मचारियों के लिए, जनवरी 2025 से लागू होने वाली डीए बढ़ोतरी उम्मीदों के अनुरूप नहीं है। केवल 2% की संभावित बढ़ोतरी पिछले सात वर्षों में सबसे कम है, जो कर्मचारियों को थोड़ी निराशा दे सकती है। हालांकि, यह बढ़ोतरी महंगाई दर के आंकड़ों पर आधारित है, जिनसे पता चलता है कि महंगाई की दर में कमी आई है।
कर्मचारियों को अभी जुलाई 2025 में होने वाली अगली डीए बढ़ोतरी और आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार करना होगा, जो उनके वेतन और भत्तों में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती हैं। आने वाले समय में सरकार इन मुद्दों पर क्या कदम उठाती है, यह देखना रोचक होगा।
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसमें दी गई जानकारी विभिन्न स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे किसी भी निर्णय लेने से पहले आधिकारिक सूचनाओं और घोषणाओं की पुष्टि करें। लेखक या प्रकाशक इस जानकारी की सटीकता, पूर्णता या उपयोगिता के लिए कोई जिम्मेदारी नहीं लेते हैं। सरकारी नीतियों और घोषणाओं में परिवर्तन हो सकता है, इसलिए अद्यतन जानकारी के लिए सरकारी वेबसाइटों या आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों का संदर्भ लें।